वबासीर पाइल्स या हेमोराइड
![]() |
| पाइल्स या हेमोरॉयड |
वबासीर को पाइल्स या हेमोरॉयड के रूप में भी जाना जाता है। पाइल्स एक बहुत ही आम बीमारी है और पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है, सूजन या सूजन ऊतक होते हैं जिसमें गुदा के चारों ओर या गुदा के अंदर पाए गए रक्त वाहिका को बढ़ाया जाता है लगभग 50% लोग अपने जीवन में किसी भी उम्र में पाइल्स से प्रभावित होते हैं। गर्भवती महिलाओं को भी इस स्थिति का अनुभव मिलता है। पाइल्स का कारण बनने के लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं है हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कमजोर नसों के कारण हो सकता हैं |
बवासीर कितने प्रकार के होते हैं?
आंतरिक वबासीर - जो बाहर से दिखाई या महसूस नहीं किया जा सकता है और जो केवल गुदा
के मार्ग के अंदर स्थित होता हैं । रक्तस्राव इस प्रकार के ढेर का एकमात्र लक्षण
है।
बाहरी वबासीर - जो छोटे-छोटे गांठों में बनते हैं और दर्द-संवेदना नसों के अगल बगल में गुदामार्ग के चारों ओर स्थित होते हैं।
पाइल्स होने का कारण क्या है? - जाने पाइल्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर देवरिया से
पाइल्स के कारण- कब्ज के कारण पेट साफ नहीं होता है और मल त्याग करने में जोर लगाना पड़ता है जिसकी वजह से पाइल्स की समस्या हो जाती है। - जो लोग ज़्यादा देर तक खड़े या बैठकर काम करते हैं, उन्हें भी बवासीर की समस्या हो जाती है। - पाइल्स का एक मुख्य कारण मोटापा भी देखा गया है। - प्रेग्नेंसी के दौरान भी कई महिलाओं को पाइल्स की समस्या हो जाती है।
बवासीर जड़ से खत्म कैसे होता है? - जाने पाइल्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर देवरिया से
आसान से घरेलू
नुस्खे बवासीर को जड़ से खत्म करने में कारगर है
- छाछ और जीरा – बवासीर को जल्द से जल्दी
ठीक करने का यह बेहतरीन उपाय है। ...
- इसबगोल – इसबगोल की भूसी खाने से
पेट साफ रहता है और मल की कठोरता कम होती है। ...
- बड़ी इलायची – बड़ी इलायची की 50
ग्राम
मात्रा लेकर तवे पर भून लीजिए।
बवासीर के लिए
क्या खाना चाहिए? – जाने पाइल्स स्पेशलिस्ट डॉक्टर
देवरिया से
पर्याप्त मात्रा
में पानी पीने से बवासीर में मदद मिलती है ...
- साबुत अनाज बवासीर में
फायदेमंद होते हैं ...
- फलों का सेवन बवासीर में
अच्छा माना जाता है ...
- बवासीर में हरी पत्तेदार
सब्जियों का सेवन फायदेमंद होता है ...
- छाछ का सेवन बवासीर के
लक्षणों को कम करता है ...
- बवासीर में हर्बल चाय का सेवन प्रभावशाली होता है
बवासीर की शुरुआत कैसे होती है? - जाने पेट के डॉक्टर स्पेशलिस्ट देवरिया से
- गुदा के आस-पास कठोर गांठ
जैसी महसूस होती है। ...
- शौच के बाद भी पेट साफ ना
हेने का आभास होना।
- शौच के वक्त जलन के साथ
लाल चमकदार खून का आना।
- शौच के वक्त अत्यधिक
पीड़ा होना।
- गुदा के आस-पास खुजली,
एवं
लालीपन, व सूजन रहना।
- शौच के वक्त म्यूकस का
आना।
- बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना, लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।
महिलाओं में बवासीर कैसे होता है? जाने जठरांत्र चिकित्सक देवरिया गोरखपुर से
गर्भावस्था के बाद बवासीर के कारण प्रोजेस्टेरोन की वजह से गर्भवती महिला को कब्ज हो सकता है, क्योंकि यह आंत्र पथ यानी इनटेस्टनाइल ट्रैक्ट को धीमा कर देता है। कब्ज के दौरान मल काफी सख्त हो जाता है। सख्त मल के कारण बवासीर की स्थिति और खराब हो जाती है। डिलीवरी के दौरान बहुत ज्यादा दबाव बनाने के कारण बवासीर हो सकता है।
क्या Piles हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?
अगर पाइल्स ग्रेड 1 या ग्रेड 2 के हैं यानी आकार में छोटे हैं तो दवाओं से उन्हें ठीक किया जा सकता है। खाने और लगाने दोनों की ही दवाएं दी जाती हैं। पाइल्स की शुरुआती स्टेज में इसी तरीके से इलाज हो जाता है।
बवासीर में
परहेज क्या करना चाहिए -
- बवासीर (पाइल्स) में
क्या नहीं खाना चाहिए (बवासीर में परहेज)
- तैलीय और मसालेदार चीजें
तैलीय और मसालेदार चीजों में अधिक मात्रा में फैट पाया जाता है जो बवासीर की
स्थिति को गंभीर बना सकता है। ...
- सफेद ब्रेड सफेद ब्रेड को
हजम करने में काफी परेशानी होती है। ...
- चाय और कॉफी
- सिगरेट और गुटखा
इसके अलावा जाने
- बवासीर में दूध पीना
चाहिए या नहीं
- बवासीर में चावल खाना
चाहिए या नहीं
- खूनी बवासीर का इलाज
- बवासीर में आलू खाना
चाहिए कि नहीं
- खूनी बवासीर में क्या
खाना चाहिए
- बवासीर में अंडा खाना
चाहिए या नहीं
- बवासीर की गारंटी की दवा
- बवासीर में नमक खाना चाहिए या नहीं
बवासीर में कौन
सी जड़ी बांधी जाती है?
आयुर्वेद में क्षार सूत्र बवासीर रोग ठीक करने के लिए प्राचीन पद्धति है। रोगी को औषधी अपामार्ग, हल्दी, स्नूही आदि जड़ी बूटियों से उपचार होता है। इसका मिश्रण बनाया जाता है
बवासीर के मस्से
हटाने की क्रीम कौन सी है?
एनोवेट क्रीम का
इस्तेमाल आमतौर पर बवासीर के लक्षणों से राहत होने तक किया जाता है. आपके लक्षणों
से राहत मिलने के बाद इसे बंद कर सकते हैं. अगर आपके डॉक्टर ने आपको ऐसा करने की
सलाह दी है, तो एनोवेट क्रीम को जारी रखें.
बवासीर होने पर
क्या नहीं खाना चाहिए?
अगर आपको बवासीर है, तो फ्रेंच फ्राइज और ज्यादा तले हुए खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। दरअसल, ऑयली और फ्राई फूड आइटम्स में भरपूर मात्रा में फैट मौजूद होता है, जो पाचन तंत्र पर दबाव डालकर इसे कमजोर बनाता है। इसमें मिलाए जाने वाले मसाले अम्लता को बढ़ाते हैं और सूजन पैदा करते हैं
बवासीर में कौन
सी सब्जी नहीं खाना चाहिए?
बवासीर के रोगी
भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, पड़ सकता है भारी
- मिर्च बवासीर के रोगियों
को मिर्च का सेवन तो करना ही नहीं चाहिए, चाहे वो हरी या लाल
मिर्च। ...
- बाहर के खाने से करें
परहेज ...
- राजमा,
मसूर
और बीन्स न खाएं ...
- सुपारी, गुटखा, सिगरेट और पान मसाला
क्या गर्म पानी
पीने से बवासीर होता है?
गुनगुना पानी लें और तला हुआ न खाएं - कम पानी पीने से पेट में गर्मी बढ़ती है और मल सूखने लगता है, जिससे कब्ज होती है। सुबह उठते ही दो-तीन गिलास गर्म पानी पीएं, इससे पेट की सफाई होती है।
बवासीर में चाय
पीने से क्या होता है?
वास्तव में चाय और उसके साथ खाई जाने वाली चीजों में ऐसे घटक होते हैं, जो शरीर में विटामिन्स और मिनरल्स के अवशोषण में बाधा पैदा करते हैं, जिससे आपको खून की कमी, कब्ज, बवासीर और यहां तक कि आयोडीन की कमी हो सकती है। चलिए जानते हैं कि चाय के साथ किन-किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
लैट्रिन के
रास्ते में दर्द हो तो क्या करें?
खुजली, जलन और बवासीर के दर्द में : खुजली, जलन और बवासीर के दर्द से बचने के
लिए गर्म पानी की सिकाई बेहतर उपाय है। गर्म पानी में थोड़ी फिटकरी डालकर सिकाई
करें। इससे गुदा क्षेत्र में जलन, सूजन और दर्द कम करने में मदद
मिलती है और गुदा परिसंचरण में सुधार होता है। इसके लिए मेडिकल स्टोर पर सिज बाथ
टब भी मिल जाता है।
क्या बवासीर खतरनाक बीमारी है?
क्या बवासीर
खतरनाक बीमारी है?
पाइल्स की समस्या बेशक आम है लेकिन बेहद खतरनाक भी। समय रहते इसका इलाज कराना जरूरी है और साथ ही अगर इलाज के दौरान परहेज भी। खानपान की जरा सी लापरवाही ठीक हो चुकी समस्या को फिर से कर सकती है उजागर।
बवासीर के मस्सों पर कौन सा तेल लगाएं?
नारियल का तेल: पाइल्स के घरेलू उपायों में से एक ये भी है। नारियल का तेल एक प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र है, जो हेमोराइड के लक्षणों को काम करने में मदद करता है। नारियल के तेल को लगाने से जलन और सूजन कम हो सकती है। एलोवेरा: एलोवेरा का अज्वलनशील गुण बवासीर की सूजन को शांत करने में मदद करता है।
बवासीर में प्याज खा सकते हैं क्या?
बवासीर में लाभदायक है प्याज का प्रयोग (Benefits of Onion in Piles Treatment in Hindi) अक्सर कब्ज से पीड़ित लोग बवासीर (Piles) का शिकार हो जाते हैं। बवासीर से खून आने की स्थिति में सफेद प्याज के 20-30 मिली रस का सेवन करना अच्छा होता है। दिन में दो-तीन बार करने से खून आना बंद हो जाता है।
बवासीर में दही खा सकते हैं क्या?
बवासीर के
मरीजों को ओट्स, ब्राउन राइस, मल्टी ग्रेन ब्रेड आदि का सेवन करना चाहिए. ये आसानी से पच जाते
हैं और शौच में दिक्कत नहीं होती है. दही या छाछ के सेवन से पाचन बेहतर होता है, जिससे मल त्याग में समस्या नहीं होती है
पाइल्स की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
नारियल तेल और
हल्दी पाउडर
बवासीर कि समस्या होने पर नारियल के तेल में थोड़ा सा हल्दी पाउडर मिलाकर इसे अपने पाइल्स की जगह पर यानी हल्के हाथों से या कॉटन लगाने से आपको गुदा के हिस्से पर होने वाले बवासीर से राहत मिलती है. इसे कुछ दिनों तक लगातार करें.
क्या बवासीर को जड़ से खत्म किया जा सकता है?
दूध और नींबू
पाइल्स की समस्या से निजात दिलाने में काफी कारगर है। यह खूनी बवासीर को भी 3 दिनों के अंदर ठीक कर देता है। इसके लिए सुबह खाली पेट एक कप ठंडे
दूध में आधा नींबू निचोड़ कर तुंरत पी जाए। केला में नेचुरल लैक्सटिव के रूप में
काम करता है।
पुरानी बवासीर
का क्या इलाज है?
Piles home treatment: पुरानी से पुरानी बवासीर का शर्तिया इलाज कर सकती हैं घर-घर में मिलने वाली ये 4 जड़ी बूटियां
- तिल के बीज और तेल खत्म करेगा बवासीर इसका वैज्ञानिक नाम सेसमम इंडिकम है।
- खूनी बवासीर का रामबाण इलाज जामुन का पेड़ इसका वैज्ञानिक नाम सायजीजियम क्यूमिनी है।
- बवासीर के लिए नीम
- बवासीर का घरेलू इलाज है-एलोवेरा
बवासीर की
आयुर्वेदिक औषधियां कौन सी हैं ?
कांकायन वटी
कांकायन वटी अदरक, पिप्पली जड़ी बूटियों और हरीतकी को मिलाकर बनाया जाता है। बवासीर से पीड़ित होने पर गुदा के आस-पास की नसों में खून जमने लगता है। नियमित रूप से इस
दवा का सेवन करने से गुदा की नसों में खून का जमाव ठीक होने के साथ साथ बवासीर के कारण उत्पन्न दर्द और सूजन भी दूर हो जाता है। यह भूख बढ़ाने तथा तथा कब्ज को दूर करने का काम करता है, जिससे बवासीर के लक्षण कम होने लगते हैं
इसे पढ़े क्यों बवासीर के दर्द को नजरअंदाज न करें
त्रिफला गुग्गुल
बवासीर के
लक्षणों को दूर करने वाली खास आयुर्वेदिक दवाओं में त्रिफला गुग्गल का नाम भी
शामिल है। यह दवा पिप्पली, हरीतकी, गुग्गल, विभूतकी और आंवला जैसी जड़ी
बूटियों से मिलकर निर्मित होती है। इसका सेवन करने से बवासीर के कारण गुदा में
जन्म दर्द और सूजन खत्म हो जाता है, साथ ही साथ इंफेक्शन की संभावनाएं
भी कम हो जाती हैं। अगर आप बवासीर
(Piles) से पीड़ित हैं और उपचार के लिए अच्छी आयुर्वेदिक दवा की तलाश में हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श करने के बाद त्रिफला गुग्गल का उपयोग करना चाहिए। यह आपकी परेशानी को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से कम कर सकता है
अंजीर
अंजीर पेट से जुड़े विकारों को नष्ट करके बवासीर के लक्षणों को खत्म करता है। इसके सेवन से पाइल्स के कारण उत्पन्न दर्द, जलन और खुजली काफी हद तक खत्म हो जाती है। इतना ही नहीं, अंजीर खाने से पाचन तंत्र ठीक होता हैं एवं पाचन से संबंधित समस्याएं जैसे की पेट में गैस बनना, खाना हजम नहीं होना, समय पर शौंचशौं नहीं आना आदि भी दूर हो जाते हैं। आप अंजीर को पानी में भिगोकर खा सकते हैं।
मंजिष्ठा
रक्त की गंदगी साफ करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है। इसका उपयोग बवासीर के अलावा कैंसर, किडनी स्टोन, दस्त और पेचिश की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जाता है। मंजिष्ठा में ट्यूमर नष्ट करने वाले तथा ऊतकों को सिकोड़ने के गुण मौजूद होते हैं। बड़े से बड़े घाव को मंजिष्ठा आसानी से भर देती है। बवासीर में खून के थक्केगांठ के रूप में देखने को मिलते हैं। मंजिष्ठा के सेवन से यह जल्द ही नष्ट हो जाते हैं, इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर भी सामान्य रखने में मदद करती है। आप मंजिष्ठा का पाउडर, काढ़ा या पेस्ट का सेवन कर सकते हैं।
हरीतकी
हरीतकी को आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे गुणकारी औषधि माना जाता है। यह पाचन संबंधी बीमारियों को ठीक करने के लिए सदियों से उपयोगी है। कब्ज पर लगाम लगाकर यह मलत्याग के दौरान होने वाले दर्द को कम करता है और अप्रत्यक्ष रूप से मस्सों को कम करने में सहायक होता है। बवासीर को ठीक करने के अलावा हरीतकी का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों में भी किया जाता है, जिसमें शरीर की कमजोरी को दूर करना, डायरिया को ठीक करना, गैस और कब्ज से राहत दिलाना आदि शामिल हैं।
नोट– ये दवाइयाँ सिर्फ जानकारी देने के लिए प्रस्तुत की गयी हैं, इसलिए इसका सेवन डॉक्टर की परामर्श के बाद ही करें, दवाइयों के बारे में जानने के लिए आप हमारे डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। सलाह लेने के लिए कॉल करें या अपॉइंटमेंट बुक करें
सूरन
बवासीर में गुदा में फोड़े हो जाते हैं जिसके कारण मलत्याग करने में असहजता होती है। विशेषज्ञ के अनुसार सूरन खूनी बवासीर में बहुत फायदेमंद होता है। यह कब्ज की शिकायत दूर करता है जिससे बवासीर के बढ़ने का खतरा कम हो जाता है। पेट में कीड़े होने पर भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। मल द्वार से खून निकलने और गुदा क्षेत्र में खुजली होने पर सूरन का इस्तेमाल कर सकते हैं
अर्शकल्प
बवासीर के लिए अर्शकल्प बहुत ही अच्छी आयुर्वेदिक दवा है। बाजार में आप पतंजलि या फिर वेदऋषि की अर्शक्ल्प वटी नामक टेबलेट का इस्तेमाल कर सकते हैं। दोनों ही कंपनी की दवाइयां अपनी-अपनी जगह बेहतर कार्य करती हैं। इनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं जो बवासीर का इलाज करने के लिए एक बेहतर विकल्प साबित होते हैं।
बवासीर का इलाज करने की एलोपैथी दवाइयां
बवासीर की
अंग्रेजी दवा- Allopathic medicines for
piles in Hindi
नोट– नीचे दी गई दवाइयों के सेवन से गहरे साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, ये दवाइयाँ सिर्फ जानकारी देने के लिए प्रस्तुत की गयी हैं, इसलिए इसका सेवन डॉक्टर की परामर्श के बाद ही करें, दवाइयों के बारे में जानने के लिए आप हमारे डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। सलाह लेने के लिए कॉल करें या अपॉइंटमेंट बुक करें।
Alocaine:
रोगी की उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को देखकर यह दवा दी जाती है। यह दर्द कम करने में भी सहायक है।
Alocaine :
स्तनपान कराने
वाली महिलाएं या गर्भवती महिलाएं Alocaine
का सेवन कर सकती
हैं। लेकिन इस दवा के कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से पूछकर ही करें।
बवासीर की
अंग्रेजी दवा - Allopathic medicines for piles in
Hindi
Alocaine
Fubac
Mahacal
Throatsil
Xylocard
Xylox
बवासीर का इलाज
करने की होम्योपैथिक दवाइयां
होम्योपैथिक
इलाज -
होम्योपैथी
विशेषज्ञ के अनुसार इस पद्धति से पाइल्स का बिना सर्जरी के इलाज संभव है। पहली व
दूसरी स्टेज तक ये दवाएं कारगर होती हैं।
दवाएं : पेट साफ होने के दौरान तेज दर्द के साथ फिशर की समस्या हो तो साइट्रिक एसिड दवा देते हैं।
मरीज को मोशन के
समय पाइल्स के साथ रक्त आए तो सल्फर दवा देते हैं।
जब मरीज को गुदा मार्ग पर त्वचा संवेदनशील लगे तो ऐसे में पायोनिया दवा से आराम दिलाया जाता है।
पाइल्स के साथ कमरदर्द और गुदा मार्ग पर सुई जैसी चुभन होने पर मरीज को एस्कुलस दवा देते हैं।
लंबे समय से
कब्ज की समस्या के बाद यदि पाइल्स की परेशानी हो तो साइलेशिया दवा का प्रयोग करते
हैं।।




0 Comments